मित्रों
आप सभी हमारी इस चौथी दुनिया से परिचित हैं...इस क्षेत्र में अपने परिवार के लिए भी समय निकाल पाना बेहद कठिन है...मैं कई ऐसे रिपोर्टरों को जानता हूं जो व्यस्तता के कारण घर परिवार वालों से बहिषकृत हो गए हैं...क्योंकि जब वे घर जाते हैं उनके बच्चे सो चुके होते हैं और जब वे सोकर उठते हैं तब उनके बच्चे स्कूल जा चुके होते हैं...बच्चों की तो संडे की छुट्टी होती है पर उन रिपोर्टरों की नहीं होती...
ऐसे में ब्लॉग बनाना और उस पर लगातार लिखना बेहद टेढ़ी खीर है...मगर फिर भी सर ओखली में डाला है तो सोचना क्या है...अब लिखते रहेंगे चाहे कोई पढ़े या ना पढ़े...
कम से कम अपनी तो भड़ास निकलती रहेगी जिससे कब्ज़ियत दूर होती रहेगी...
नवीन सिंह , ज़ी न्यूज़ छत्तीसगढ़...
Thursday, July 16, 2009
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