मंदी की मां का - मंदी की बहन का...
ऐसी गालियों की तुकबंदी आजकल आप हर प्राइवेट कंपनीज़ में काम करने वाले कर्मचारियों के मुंह से सुन सकते हैं...चाहे आप चाय पी रहे हो या सिगरेट,बाजार में खड़े हो या घर में...कहीं भी...
इतनी गालियां तो कभी नेताओं ने भी नहीं खायीं होंगी जितनी ये बेचारी मंदी खा रही है...सबको परेशान कर के रखा है...
आखिर इसको गरियाने का कारण क्या है...
दरअसल दुनिया में आई इस वैश्विक मंदी ने कुछ देशों को परेशान तो किया ही है मगर भारत जैसे देश को इतना परेशान नहीं किया है...खासकर मीडिया सेक्टर तो इतना प्रभावित नहीं है...जितना कंपनियों के मालिक रो रहे हैं...
8 घंटे की शिफ्ट में कुछ नहीं तो 800 बार मंदी का ज़िक्र सुनने को मिलता है...कभी किसी से तो कभी किसी से...
हालाकि अब बोर भी हो गए हैं और इरिटेट भी...और अब सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है...
सीनियर और मंदी के जानकार या मंदी विशेषज्ञ अक्सर ये राय देते हैं कि बेटा कुछ दिन का और कष्ट है रुक जाओ...अभी नौकरी छोड़ने की बात मत करो...कहीं कुछ नहीं हो पा रहा है,मैं तो खुद लगा हुआ हूं...
कभी कभी ऐसा भी लगता है कि संस्थान के मालिक मजे ले रहे हैं...जानते हैं साले कहीं भागेंगे नहीं और भागेंगे भी तो सब एकसाथ नहीं...इसलिए अभी न तो इनकी सैलरी में कोई इन्क्रिमेंट लगाओ और न ही कोई प्रोमोशन दो...
एक और बात शायद मैंने इतने विज्ञापन सामान्य समय में नहीं देखे होंगे जितने मंदी के दौर में देखने को मिल रहे हैं...
सुना है चैनल भी पिछले कुछ महीनों से लगातार नंबर 1 पर बना हुआ है...अच्छा है मियां घायल शेरों की मेहनत है...
रंग तो लाएगी ही...ले लो मजे...
मंदी की वजह से साला शिफ्ट का टाईम भी बढ़ा दिया है...हालाकि बढ़ाने वाले साहब लोगों की भी मजबूरी है...मालिक का हितैषी जो बनना है...साहब लोगों को भी किसी चीज़ में ना करना नहीं आता...मीटिंग में उच्च अधिकारी कुछ बोलते हैं कि ये काम हो सकता है क्या??? साहब लोग तुरंत जी सर हो जाएगा - आप निश्चिंत हो जाइए...तुरंत एक आदेश आता है बेटा ये सरकारी काम है इसे तुरंत समझ लो...मरती हम लोगों की है...बढ़िया है किसी को तो फायदा होता है...
महंगाई लगातार बढ़ रही है सैलेरी उतनी ही है...साला महंगाई और वेतन के बढ़ने घटने का कोई अनुपात ही नहीं बन पा रहा है...हमसे अच्छे तो सरकारी कर्मचारी है जिनके पास मंदी की हवा फटकती तक नहीं है...सरकारी कर्मचारी राजा जैसे काम करो के सिद्धांत पर चलते हैं...काम करना हो तो करो न करना हो तो मत करो...कोई सस्पेंड भी करेगा तो आधी तन्ख्वाह तो मिलेगी ही...
बहरहाल इन सब के बीच हमारे जैसे लोगों के ताज़िये ठंडे हो गए हैं...बुरे फंसे हैं जवानी के इस गोल्डन पीरियड में...अंत में इतना लिखते लिखते तो एक बार फिर मेरा मन कर रहा है मंदि को गरियाने का...मंदी की मां का...
नवीन सिंह , ज़ी न्यूज़ छत्तीसगढ़
Tuesday, September 22, 2009
Wednesday, September 16, 2009
मोदी के 59 बरस...
17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा के एक मध्यम वर्गीय परिवार में नरेंद्र मोदी नाम का एक कमल का फूल खिला...जो आज वाइब्रेंट गुजरात का मुखिया है...मोदी आज 59 साल के हो गए हैं...अपने आक्रामक तेवर व अपनी विकासशील सोच के लिए पहचाने जाने वाले मोदी ने अपने जीवन में काफी उतार चढ़ाव देखे हैं...इमरजेंसी से लेकर गोधरा दंगों तक...विरोधी उन्हें मौत का सौदागर कहते रहे और उनपर चौतरफा हमले करते रहे पर वे अपना काम पूरी द़ढ़ता के साथ करते रहे...यही उनकी ताकत है...
नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे लोकप्रिय और सबसे ज़्यादा लंबे समय तक राज करने वाले मुख्यमंत्री हो गए हैं...गुजरात में भाजपा के वर्चस्व का एकमात्र कारण मोदी ही हैं...2002 में गुजरात में हुआ दंगों के बाद उन पर कट्टर हिंदू सांप्रदायिक नेता होने का कलंक लगा जिसे वह विकास के तमाम दावों के बावजूद साफ नहीं कर पाए...ये उनकी किस्मत ही है या विरोधियों की राजनीति...
नरेंद्र मोदी ने राजनीति मे अपना करियर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य के तौर पर शुरू किया...1987 में वह बीजेपी में शामिल हुए और एक ही साल में गुजरात शाखा के महासचिव बन गए...1995 में जब बीजेपी दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आई तो मोदी को पार्टी के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई...केशुभाई पटेल के नेतृत्व वाली यह सरकार कुछ ही समय चली और शंकरसिंह वाघेला के बीजेपी से अलग हो जाने से सरकार गिर गई...
1998 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी फिर सत्ता में आई...मगर केशुभाई का राज जनता को रास नहीं आया और उसका नतीज़ा 2001 के उपचुनावों में पार्टी की हार के रूप में सामने आया...तब सरकार और पार्टी को उबारने के लिए मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया...जो कि गुजरात के विकास के लिए सही निर्णय था...
2002 फरवरी में गोधरा स्टेशन पर हिंदू तीर्थयात्रियों से लदी एक ट्रेन में आग लगने(बनर्जी कमिशन की रिपोर्ट के मुताबिक) या लगाने (नानावटी कमिशन की रिपोर्ट के मुताबिक) की घटना के बाद भीषण मुस्लिम विरोधी दंगे भड़के...जिससे मोदी सरकार को खुला समर्थन मिला... मोदी हिंदुओं के नायक के तौर पर उभरे और उनको जनसमर्थन का फल 2002 और 2007के चुनावों में मिला...साथ ही हाल ही में हुए उपचुनावों में भी मोदी को उन मुस्लिम इलाकों में भी जनसमर्थन मिला जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी...
मोदी को उनके प्रशंसक और शुभचिंतक उन्हें राष्ट्रीय राजनीति करते देखना चाहते हैं...भारत को उनके जैसे द़ढ़निश्चयी नेता की सख्त ज़रूरत है...
अन्त में मोदी को नमन और जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं...
नवीन सिंह , ज़ी न्यूज़ छत्तीसगढ़...
नरेंद्र मोदी गुजरात के सबसे लोकप्रिय और सबसे ज़्यादा लंबे समय तक राज करने वाले मुख्यमंत्री हो गए हैं...गुजरात में भाजपा के वर्चस्व का एकमात्र कारण मोदी ही हैं...2002 में गुजरात में हुआ दंगों के बाद उन पर कट्टर हिंदू सांप्रदायिक नेता होने का कलंक लगा जिसे वह विकास के तमाम दावों के बावजूद साफ नहीं कर पाए...ये उनकी किस्मत ही है या विरोधियों की राजनीति...
नरेंद्र मोदी ने राजनीति मे अपना करियर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य के तौर पर शुरू किया...1987 में वह बीजेपी में शामिल हुए और एक ही साल में गुजरात शाखा के महासचिव बन गए...1995 में जब बीजेपी दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आई तो मोदी को पार्टी के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई...केशुभाई पटेल के नेतृत्व वाली यह सरकार कुछ ही समय चली और शंकरसिंह वाघेला के बीजेपी से अलग हो जाने से सरकार गिर गई...
1998 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी फिर सत्ता में आई...मगर केशुभाई का राज जनता को रास नहीं आया और उसका नतीज़ा 2001 के उपचुनावों में पार्टी की हार के रूप में सामने आया...तब सरकार और पार्टी को उबारने के लिए मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया...जो कि गुजरात के विकास के लिए सही निर्णय था...
2002 फरवरी में गोधरा स्टेशन पर हिंदू तीर्थयात्रियों से लदी एक ट्रेन में आग लगने(बनर्जी कमिशन की रिपोर्ट के मुताबिक) या लगाने (नानावटी कमिशन की रिपोर्ट के मुताबिक) की घटना के बाद भीषण मुस्लिम विरोधी दंगे भड़के...जिससे मोदी सरकार को खुला समर्थन मिला... मोदी हिंदुओं के नायक के तौर पर उभरे और उनको जनसमर्थन का फल 2002 और 2007के चुनावों में मिला...साथ ही हाल ही में हुए उपचुनावों में भी मोदी को उन मुस्लिम इलाकों में भी जनसमर्थन मिला जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी...
मोदी को उनके प्रशंसक और शुभचिंतक उन्हें राष्ट्रीय राजनीति करते देखना चाहते हैं...भारत को उनके जैसे द़ढ़निश्चयी नेता की सख्त ज़रूरत है...
अन्त में मोदी को नमन और जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं...
नवीन सिंह , ज़ी न्यूज़ छत्तीसगढ़...
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